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कर्मचारियों की जेब पर डाका डालकर पूंजीपतियों के अरबों के कर्ज माफ कर रही है सरकार : राजीव द्विवेदी

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rajeev dwivedi congress leader
rajeev dwivedi congress leader

कानपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने twitter पर चलाया ‘#पूछती है कांग्रेस’ अभियान

  • कानपुर से वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव द्विवेदी ने देश में व्याप्त कोरोना महामारी, परिणाम स्वरूप देश के सामने पैदा हुए आर्थिक संकट और खराब कानून व्यवस्था को देखते हुए केंद्र सरकार के तमाम निर्णयों पर सवाल उठाये हैं।
  • उनका कहना है कि एक तरफ तो सरकार ने कोरोना संकट के दौर में अपने लाखों कर्मचारियों के महंगाई भत्तों में बढ़ोतरी पर रोक लगाकर उनकी आय पर कैची चला दी है लेकिन पूंजीपतियों के करोड़ों अरबों रुपये के कर्जों को विगत समय में या तो माफ कर दिया गया है या बट्टे खाते में डाल दिया गया है। केंद्र सरकार अपने खर्चों में कटौती करने के विषय पर दोहरा मापदंड अपना रही है।
  • वह पूंजीपतियों का समर्थन कर रही है लेकिन आम आदमी और आम कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात कर रही है। वह कहते हैं एक ओर सरकार कर्मचारियों को होने वाली सीमित आय पर कैची चलाने की तैयारी में है लेकिन देश के बैंकों का हजारों करोड़ रुपये विदेश भाग गये मेहुल चौकसे जैसे लोगों के कर्ज माफ कर दिये गये हैं। सरकार को इस बात का जवाब देना होगा।
  • राजीव ने ट्विटर पर हैशटैग (#) अभियान चलाकर केंद्र सरकार से कई सवाल दागे हैं।

rajeev dwivedi tweets

  • राजीव का कहना है कि केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर पूरी तरह से विफल हो चुकी है। महाराष्ट्र के पालघर में अपने गुरु के अंतिम संस्कार में जा रहे साधुओं की हत्या का मुद्दा अभी सुलझा नहीं था कि यूपी के बुलंदशहर में भी संतों को नृशंस हत्या कर दी गई। और तो और महाराष्ट्र में इस मुद्दे को सांप्रदियक रंग देकर इस पर राजनीति करने की पूरी करने की कोशिश की गई। लेकिन उत्तर में तो एक साधु की सरकार है तो फिर कैसे संतों की हत्या कर दी गई। राज्यों की भाजपा सरकारें पूरी तरह से कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाये रख पाने में नाकाम साबित हो रही हैं।

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rajeev dwivedi profile

  • टीवी न्यूज चैनल रिपब्लिक भारत के संपादक अरनब गोस्वामी की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर विवादास्पद टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने अपने हैशटैग अभियान के माध्यम से अरनब गोस्वामी और उनकी पत्रकारिता के तौर-तरीकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। उन्होंने पूछा है कि TV debate में जिस तरह से अरनब ने कांग्रेस अध्यक्ष का अपमान भरे लिहाज से संबोधन किया है क्या उस तरह का पत्रकारिता व्यवहार 2014 के बाद से भाजपा नेता अमित शाह के लिए भी किया है?

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