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अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या सरकार मानेगी राजन की बात : राजीव द्विवेदी

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rahul gandhi and raghuram rajan
rahul gandhi and raghuram rajan

कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी से उतर गई है। इस महामारी ने गरीबों को आर्थिक रूप से तबाह कर दिया है। मजदूरों को भिखारी बना दिया है। केंद्र सरकार लगातार हालात की समीक्षा कर रही है। प्रधानमंत्री लगातार देश के राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अपनी सरकार के मंत्रियों के साथ वार्ता में व्यस्त में हैं। लेकिन लॉकडाउन को बढ़ाने और रेड, ग्रीन, ऑरेंज जोन, कर्फ्यू, सख्ती, पुलिस का पहरा, धारा 144, दुकानें खुलने की छूट इन आदि तथ्यों के अलावा कोई भी बात आगे बढ़ती नहीं दिखायी दे रही है। चाहे सरकार हो या आम आदमी अर्थव्यवस्था पटरी पर कैसे आयेगी इसका पुख्ता खाका किसी के पास नहीं है।

इस बीच हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद चुनौतियों से निपटने के लिए सुझाव दिये हैं। ये सुझाव राजन ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को उनके साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से किए गए संवाद में दिये हैं।

इसके बाद कानपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव द्विवेदी ने पूछा है कि क्या सरकार जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए देश के सफलतम आरबीआई गवर्नरों में से एक रघुराम राजन के सुझावों को मानेगी।

rajeev dwivedi/congress
rajeev dwivedi/congress

रघुराम राजन ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से बातचीत में कहा है कि अगर सरकार सही अर्थों में लॉकडाउन की वजह से अपनी नौकरी खो चुके मजदूरों की मदद करना चाहती तो उनके लिए जारी किये राहत पैकेज के पैसे उनके खातों में सीधे ट्रांसफर करने चाहिए। इसके लिए सरकार को 65000 करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। राजन ने कहा है कि हमारी अर्थव्यवस्था 200 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की है और हम 65 हजार करोड़ रुपये वहन कर सकते हैं। हमें अपनी अर्थव्यवस्था को जल्द खोलना होगा। साथ ही कोरोना वायरस से निपटने के कदम उठाते होंगे।

‘निर्णय लेने की शक्तियों का केंद्रीकरण उचित नहीं’

राजन ने राहुल गांधी की इस बात को स्वीकार किया कि निर्णय लेने की शक्तियों का केंद्रीकरण उचित नहीं है। विकेंद्रीकृत और सहभागिता से किया गया निर्णय बेहतर होता है। कांग्रेस नेता के एक प्रश्न के उत्तर में राजन ने कहा, ‘इन हालात में भारत अपने उद्योगों एवं आपूर्ति श्रृंखला के लिए अवसर हासिल कर सकता है। परंतु हमें इस बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में संवाद का प्रयास करना होगा।’

बढ़ानी होगी कोरोना जांच की संख्या  

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने भारत में कोरोना की जांच की संख्या के मुद्दे पर कहा कि अमेरिका में रोजाना औसतन 1,50,000 जांच हो रही है। तमाम विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 5 लाख लोगों की जांच करनी चाहिए। भारत में हम रोजाना 20-25 हजार जांच कर रहे हैं। ऐसे हमें बड़े पैमाने पर जांच करनी होगी।

छिन चुका है 10 करोड़ लोगों का रोजगार

रघुराम ने कहा कि लॉकडाउन के बाद भारत के संदर्भ में अब तक जो आंकड़े आए हैं वो चिंताजनक हैं। अगर आप सीएमआईई के आंकड़े को देखें तो कोविड-19 के कारण 10 करोड़ और लोगों से रोजगार छिन गया है। अर्थव्यवस्था को हमें इस तरह से खोलना होगा कि लोग फिर से काम पर लौट सकें। उन्होंने कहा कि हमारे पास इतनी बड़ी संख्या में लोगों की लंबे समय तक मदद करने की क्षमता नहीं है।

निजी क्षेत्र में पैदा हों रोजगार के अच्छे अवसर 

राजन ने कहा कि रोजगार के अच्छे अवसर निजी क्षेत्र में होने चाहिए, ताकि लोग सरकारी नौकरियों के मोह में न बैठें। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी आउटसोर्सिंग उद्योग का जिक्र किया कि किसी ने सोचा नहीं था कि यह इस तरह एक मजबूत उद्योग बनेगा। उन्होंने कहा कि यह आउट सोर्सिंग क्षेत्र इसलिए पनप और बढ़ सका क्योंकि उसमें सरकार का दखल नहीं था।

हमेशा के लिए नहीं लागू रख सकते लॉकडाउन 

रघुराम राजन ने कहा कि लॉकडाउन हमेशा के लिए जारी नहीं रखा जा सकता। आर्थिक गतिविधियों को खोलने की जरूरत है ताकि लोग अपना काम-धंधा फिर शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन खोलने के साथ ही हमें दूसरे उपायों पर भी तेजी से काम करना होगा।