Home nation एक आम भारतीय की आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विनम्र अपील

एक आम भारतीय की आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विनम्र अपील

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prime minister Narendra Modi
prime minister Narendra Modi
  • हमारे प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि वे बहुत दूरदर्शी, हिंदू हितैषी, पढ़े-लिखे और समझदार हैं।
  • दिन में 18-18 घंटे काम करते हैं। मतलब बहुत मेहनती हैं। कई बार दावे कर चुके हैं कि दिन में विपक्षी दलों के लोगों से प्रतिदिन 2 से 2.5 किलो गालियां खाते हैं।
  • उनकी छाती 56 इंच की है, ऐसा दावा वे चुनावी रैली में कर चुके हैं।
  • कड़े फैसले लेने में माहिर हैं।
  • उनके कड़े फैसले देश का कितना भला करते हैं ये तो अभी एक बार भी साबित नहीं हुआ है लेकिन वे देश की जनता पर कितने भारी पड़ जाते हैं, ये कई बार साबित हो चुका है।
  • वर्ष 2016 में हमारे प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का कड़ा फैसला लिया था।
  • परिणाम यह हुआ कि पूरा देश बैंकों और एटीएम की लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा हो गया। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से उन लाइनों में 100 से ज्यादा लोग मारे गये।
  • उस नोटबंदी से कितना कालाधन वापस लौटा, इसका पता आज तक नहीं चला। लेकिन मध्यम वर्ग और आम लोगों की छोटी-मोटी बचत भी बैंकों में पहुंच गई। बाद में वह धन पूंजीपतियों को लोन के रूप में बांट दिया गया, कालांतर में वह एनपीए हो गया और नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चौकसे लोग देश का अरबों रुपया लेकर विदेशों में भाग गये।
  • एक जुलाई 2017 को ऐसी जीएसटी लागू कर 56 इंच की छाती दिखा दी। उससे हुआ ये कि देश के छोटे उद्योग धंधे ही चौपट हो गये। 2019 की CMIE रिपोर्ट के अनुसार देश में बेरोजगारी का आंकड़ा 45 वर्षों के सर्वोच्चतम स्तर पर पहुंच गये।
  • अखबारों में, टीवी चैनलों में छोटे कारोबारियों के डूबने, उनके आत्महत्या की खबरें सामने आती रहीं।
  • आज दुनिया में कोरोना महामारी फैली तो पिछले साल दिसंबर, इस वर्ष के जनवरी, फरवरी में सोते रहे। जब 21 मार्च को जागे तो पूरे देश में लॉकडाउन/कर्फ्यू लगा दिया।
  • 24 मार्च को जो जहां था वहीं फंसा रह गया। मजदूर भूखे मरने लगे।
  • यातायात के सभी साधन अचानक बंद कर दिये।
  • नतीजा ये हुआ कि लाखों प्रवासी मजदूर अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिवार के साथ पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े।
  • अब तक 75 से ज्यादा मजदूर ट्रेन और सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा चुके हैं। अभी न जाने कितने मजदूर मारे जायेंगे। क्योंकि पलायन का दौर अभी जारी है।
  • जो मजदूर मारे जा रहे हैं, परेशान हो रहे हैं, पैदल चल रहे हैं, वे हिंदू हैं। ज्यादातर पिछड़े और दलित तबके से संबंध रखते हैं। कुछ ऊंची जातियों से संबंध रखते हैं। उनमें अल्पसंख्यक भी शामिल हैं।
  • लॉकडाउन की वजह से देश को जो आर्थिक नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए 20 लाख करोड़ का घोषित आर्थिक पैकेज लेकर आ गये हैं। ऐसा वह दावा कर रहे हैं।
  • ये घोषित आर्थिक पैकेज तो कहीं से दिखाई नहीं दे रहा, लोन बांटने की योजनाएं ज्यादा समझ में आ रही हैं।
  • मेरा मोदी जी से विनम्र निवेदन है कि कृपया 18-18 घंटे की मेहनत न करें। 6-8 घंटे की मेहनत से ही काम चल जायेगा। मजदूरों, मध्यम वर्ग के लिए ज्यादा कुछ न करें। बस वे जो कुछ कर रहे हैं उसमें टांग न अड़ायें। उनको करने दें।
  • आपके 18-18 घंटे के पराक्रम से देश की जनता बहुत त्रस्त हो चुकी है।
  • आम आदमी कोरोना वायरस से लड़ पायेगा या मर जायेगा, उसे उसके हालात पर छोड़ दें लेकिन उसके ऊपर लॉकडाउन के नाम पर पुलिस से लाठियां न चलवायें।
  • घोषित आर्थिक पैकेज के नाम पर उसे आर्थिक राहत दें या न दें लेकिन कर्ज के मकड़जाल में फंसाने की योजनाएं न बनायें। अन्यथा वह कोरोना से बच भी गया तो बैंक वाले उससे कर्ज वसूली के नाम पर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा का सत्यानाश कर डालेंगे। वह उससे जरूर मर जायेगा।
  • आप अपने करोड़ों की लागत से बनने वाले 7 स्टार बीजेपी मुख्यालयों, जिलों में बनने वाले 5 स्टार कार्यालयों पर ध्यान दीजिये।
  • रही बात हिंदू हितों की तो ज्यादातर हिंदू अपने टैक्स के पैसे से गठित की गई पुलिस और सेना से अपने हितों की रक्षा कर लेंगे। बस कुछ हिंदुओं को ही आपकी ध्रुवीकरण राजनीति की आवश्यकता है।