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71 रुपये से भी महंगा मिल रहा पेट्रोल, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें पानी से भी कम : राजीव द्विवेदी

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petrol and diesel prices in india
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rajeev dwivedi/congress
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31 मई 2012 यानि की लगभग 8 साल पहले का समय आपको याद होगा, मनमोहन सिंह नेतृत्व में चल रही केंद्र की कांग्रेस नेतृत्व सरकार के विरोध में भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने भारत बंद का ऐलान कर दिया। कारण था महंगा पेट्रोल और डीजल। केंद्र सरकार व्यापारिक घाटे के दबाव में थी। 2012 में बाजार में कच्चे तेल की कीमत 104.09 डालर प्रति बैरल थी तब कांग्रेस सरकार के दौरान डीजल 40.91 रुपए व पेट्रोल 73.18 रुपए प्रति लीटर थे।

मौजूदा समय में एक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंड क्रूड के दाम 29 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई के दाम लगभग 24 डॉलर प्रति बैरल हैं। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। डॉलर की कीमत 76 रुपये है। इस लिहाज से एक बैरल की कीमत 2204 रुपये बैठती है। वहीं, अब एक लीटर में बदलें तो इसकी कीमत लगभग 14 रुपये के करीब आती है। जबकि देश में बोतलबंद पानी की कीमत 20 रुपये के करीब है। इसके बावजूद दिल्ली में पेट्रोल के दाम 71 रुपये और डीजल के दाम 69 रुपये प्रति लीटर से अधिक।

यह बात कानपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजीव द्विवेदी ने कही।

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राजीव द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2017-18 के वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल की कीमतों का अविनियमन इस वजह से किया था ताकि देश में इनका निर्धारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों के आधार पर किया जा सके। लेकिन हालात ये हैं जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दामों में तत्काल बढ़ोतरी कर देती हैं लेकिन जब ये घटती हैं सरकार देश की जनता को उसके सस्ते होने का लाभ नहीं देती बल्कि उत्पाद कर में बढ़ोतरी कर उसे और महंगा कर देती है। ताकि जनता के पैसों से अपने खजाने को भरा जा सके।

  • 2003 में अमेरिका में कच्चे तेल के दाम 30 डॉलर प्रति बैरल थे।

मई महीने में तेल का करार निगेटिव हो गया है। मतलब ये कि खरीदार तेल लेने से इनकार कर रहे हैं। खरीदार कह रहे हैं कि तेल की अभी जरूरत नहीं, बाद में लेंगे, अभी अपने पास रखो। वहीं, उत्पादन इतना हो गया है कि अब तेल रखने की जगह नहीं बची है। ये सब कुछ कोरोना महामारी की वजह से हुआ है।

पेट्रोल डीजल पर हद से ज्यादा टैक्स 

पेट्रोल पर फिलहाल 19.98 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती है। वैट के तौर पर 15.25 रुपये वसूले जाते है। पेट्रोल पंप के डीलर को 3.55 रुपये कमीशन दिया जाता है। राज्यों में वैट की दरें अलग-अलग हैं। यह रेंज 15 रुपये से लेकर 33-34 रुपये तक है। इसलिए राज्यों पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी अलग-अलग हैं। एक लीटर डीजल पर यह टैक्स लगभग 28 रुपये का पड़ता है। यानी पेट्रोल-डीजल की कीमत का आधा से ज्यादा हिस्सा टैक्स का है।

लगातार कमजोर हो रहा है रुपया

दूसरी वजह रुपये की कमजोरी हैं। इकोनॉमी में लगातार गिरावट के साथ ही हमारा रुपया भी लगातार कमजोर होता जा रहा है। दिसंबर 2015 में हम एक डॉलर के बदले 64.8 रुपये अदा करते थे। लेकिन अब ये 76 रुपये से ज्यादा हो गया हैं। सीधे-सीधे 15 फीसदी अधिक कीमत देनी पड़ रही है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रूड हमारे लिए सस्ता होकर भी महंगा है और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए यह बोझ बना हुआ है।

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petrol and diesel prices in India

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