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केंद्र सरकार की तानाशाही, मनमाने फैसलों से त्रस्त हो रही है देश की जनता : कलाम

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Modi government
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  • केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये और कामकाज के मनमाने तरीकों की वजह से आज देश की अर्थव्यवस्था तबाह होने के कगार पर खड़ी है। आजादी के बाद के देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि सरकार के फैसलों के वजह से जनता और मजदूर वर्ग को इतना परेशान होना पड़ा हो।
abul kalam
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  • वर्ष 2016 में रातों-रात लागू की गई नोटबंदी, उसके एक वर्ष बाद मनमानी जीएसटी के दंश से अभी देश उबरा भी नहीं था कि अचानक लागू कर दिये लॉकडाउन ने देश और देशवासियों दोनों की कमर तोड़ दी है। यह कहना है शिवहर के समाजसेवी और कारोबारी अबुल कलाम का।
  • कलाम ने कहा कि केंद्र सरकार को तानाशाही और अचानक जनविरोधी फैसले लेकर लोगों को चौंकाने की आदत पड़ी हुई है। देश जानता है कि केंद्र सरकार ने बिना तैयारी के जिस प्रकार नोटबंदी, जीएसटी लागू करके मध्यम वर्ग और कारोबारी जगत की कमर तोड़ी थी उसी प्रकार कोरोना वायरस के चलते अचानक लागू किये लॉकडाउन की वजह से हर तबके को तबाह करने का काम किया है। जबकि सरकार को लगभग 2.5 माह पहले ही इस वायरस के वैश्विक प्रभाव की जानकारी मिल गई थी।
  • लेकिन सही समय पर फैसले लेकर इस वायरस को देश में प्रवेश करने से रोकने से ज्यादा सरकार ने लोगों को आर्थिक रूप से तबाह करने का रास्ता चुना। यदि कुछ उपायों से विदेश से आने वाले लोगों को कुछ समय तक देश में प्रवेश करने से रोक दिया जाता तो इतने बड़े लॉकडाउन की जरूरत ही नहीं पड़ती।
  • कलाम का कहना है कि केंद्र सरकार में दूरदर्शिता और सही फैसले लेने की क्षमता का घोर अभाव है। यह सिर्फ देश की जनता को हिंदू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान के मुद्दों में उलझा कर रखना चाहती है। यह लगातार तीसरा मौका है जब केंद्र सरकार ने जनविरोधी फैसलों से देश की जनता को परेशान कर दिया है।
  • उन्होंने कहा कि आज देश में पेट्रोल के दाम 70 सेंट प्रति बैरल से भी नीचे चले गये हैं लेकिन सरकार देश में इसके दाम 70 रुपये प्रति लीटर से नीचे करने को तैयार नहीं है। वह इसका लाभ जनता को देने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि सरकार के मंत्री जनविरोधी और मध्यम वर्ग का दोहन करने की मानसिकता से त्रस्त हैं।
  • सरकार को हठधर्मिता को छोड़कर देश की जनता के हितों में फैसले लेने चाहिए।