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क्या आर्थिक आपातकाल की ओर बढ़ रहा है देश?

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  • आजादी के बाद की भारत एक बड़ी आपात आर्थिक स्थिति का सामना कर रहा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते देश के तमाम उद्योग-धंधे और विदेशों से आयात-निर्यात ठप पड़ गये हैं। देश की तमाम श्रमशक्ति घरों में कैद है। तमाम सेक्टरों में छंटनी की सुगबुगाहट सामने आ रही है।
  • ऐसे में कैसे ये कर्मचारी अपने पर्सनल, होम और अन्य लोन बैंकों को कैसे चुका पायेंगे यह एक बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है। भारत को इस साल के अंत तक सभी बैंक लोन के प्रिंसिपल और ब्याज के भुगतान को रद्द करने की जरूरत है इन समस्याओं का हल केवल आर्थिक आपातकाल घोषणा ही है…
  • केंद्र सरकार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल के प्रावधान लागू करने के अधिकार हैं। अनुच्छेद 360 के अंतर्गत दोनों सदनों में वित्तीय आपातकाल के प्रस्ताव की मंजूरी आवश्यक है
  • यदि आपातकाल लागू किया जाता है इसमें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कमी करने के अधिकार मिल जाते हैं। केंद्र को वित्तीय मामले में इससे भारी राहत मिलती है। सभी राज्यों के वेतन भत्तों और पेंशन को रोका या कम किया जा सकता है।
  • 2019-20 के लिए यह राशि लगभग 9 लाख करोड़ रुपए है। केंद्र के असैन्य कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का खर्च लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए है। आपातकाल लागू करने पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में कटौती करने की छूट मिल जाती है।
  • अभी सरकार को 11.5 लाख करोड़ रुपए सरकार को खर्च करना पड़ते हैं। यदि इसमें 20 फ़ीसदी की भी कमी की गई तो सरकार को 2.30 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी तो क्या सरकार बस इतने के लिए यह आर्थिक आपातकाल जैसा बड़ा कदम उठा सकती है।
  • पिछले 73 सालों में किसी भी सरकार ने वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया है लेकिन भारत मे मंदी का दौर पिछले 9 महीने से जारी है उसपर महामारी ने महामंदी का संकट खड़ा कर दिया है।
  • लॉकडाउन से पहले मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी  (CMIE) द्वारी जारी रिपोर्ट के अनुसार 2019 में बेरोजगारी की दर 7.5 प्रतिशत थी। जो 45 साल का उच्चतम स्तर था।
  • लॉकडाउन खुलने के बाद रोजगार के क्षेत्र में देश की स्थिति क्या होने वाली है इसका अनुमान सहजता से ही लगाया जा सकता है।
  • कई सरकारी और निजी बैंको का एनपीए बहुत अधिक बढ़ चुका है। ऐसे मामलों में आरबीआई को हस्तक्षेप करने की जरूरत पैदा हो रही है।
  • ऐसे में सरकार आर्थिक आपातकाल जैसा सख्त फैसला कर सकती है क्योंकि संकट इतना बड़ा है तो फैसला भी बड़ा हो सकता है।